THOUGHT OF THE DAY
"LIFE HAS NO REMOTE CONTROL, GET UP AND CHANGE IT BY YOURSELF"
केंद्रीय विद्यालय धार का पुस्तकालय विद्यालय के सांस्कृतिक और सामाजिक परिवेश में एक महत्वपूर्ण संस्थान है। यह पढ़ने, सांस्कृतिक गतिविधियों, सूचना प्राप्त करने, ज्ञान बढ़ाने, गहन सोच और बौद्धिक चर्चा का केंद्र है। इसका मुख्य उद्देश्य सभी उम्र के पाठकों में पढ़ने की आदत डालना और भारत की राष्ट्रीय विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
THOUGHT OF THE DAY
"LIFE HAS NO REMOTE CONTROL, GET UP AND CHANGE IT BY YOURSELF"
राष्ट्रीय बालिका दिवस क्यों मनाया जाता है? राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य भारत की लड़कियों को सहायता और अवसर प्रदान करना है। इसका उद्देश्य बालिकाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना और बालिका शिक्षा के महत्व और उनके स्वास्थ्य और पोषण के बारे में जागरूकता को बढ़ाना है। कन्या भ्रूण हत्या और लैंगिक असमानता से लेकर यौन शोषण तक सभी मुद्दों पर बालिकाओं और लोगों को जागरूक करना है। लड़कियों को असमानताओं, बालिका अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक भेदभाव का आज भी सामना करना पड़ता है, ऐसे में बेटियों को जागरूक करने के लिए हर साल राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। ताकि वह अपने अधिकारों को जाने और उनका सदुपयोग करे।
राष्ट्रीय बालिका दिवस का इतिहास भारत में पहली बार राष्ट्रीय बालिका दिवस 24 जनवरी 2008 में मनाया गया था। राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी। हर साल 24 जनवरी को एक खास वजह से बालिका दिवस मनाया जाता है। 24 जनवरी 1966 में भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी ने शपथ ली थी। इसलिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने 24 जनवरी को भारतीय इतिहास,महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में चुना।
राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य समाज में लड़कियों के साथ लैंगिक भेदभाव के बारे में लोगों को जागरूक करना और लड़कियों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव लाना है। भारत सरकार ने बालिकाओं की स्थिति में सुधार और भेदभाव को खत्म करने के लिए कई अभियान चलाए हैं। जैसे सेव द गर्ल चाइल्ड, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, लड़कियों के लिए मुफ्त या रियायती शिक्षा, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में महिलाओं के लिए आरक्षण शुरू आदि।
TODAY'S THOUGHT “Start where you are, use what you have, do what you can.”